ग्रंथालय विज्ञान पत्रिका रू एक ग्रन्थमिति अध्ययन

 (Granthalaya Vigyan Journal : A Bibliometric Study)

 

डाॅ. एस.आर. कश्यप

वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक, ग्रंथालय एवं सूचना विज्ञान अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)

*Corresponding Author E-mail: sr_kashyap1976@rediffmail.com

 

सारांशरू

प्रस्तुत शोध पत्र में 1995-2014 तक के प्रकाशित ‘‘ग्रंथालय विज्ञान पत्रिका’’ के 16 खंडों का ग्रंथमिति अध्ययन किया गया है। जिसका प्रमुख उद्देश्य पत्रिका में प्रकाशित लेखों की कुल संख्या, खण्ड संख्या तथा लेखकों का वर्षानुसार अध्ययन प्रस्तुत करना है। परिणामतः पाया गया कि 20 वर्ष की अवधि में 248 लेख प्रकाशित हुए है, जिनमें प्रमुख रूप से ग्रंथालय वर्गीकरण एवं सूचीकरण, सूचना प्रोद्यौगिकी, ग्रंथमिति, डिजिटल ग्रंथालय, इंटरनेट, सूचना खोज व्यवहार तथा इलेक्ट्रानिक संसाधनों से सम्बन्धित लेख हैं, जिसमें कुल 414 लेखकों का योगदान है, तथा उद्धरित संदर्भांे की कुल संख्या 1512 है।

 

शब्द कुंजी - ग्रन्थमिति, वर्षानुसार प्रकाशन, लेखों, लेखक उद्धरण, सहकारक।

 

 

 

INTRODUCTION:

ग्रंथमिति शब्द का प्रयोग सन् 1969 में एलन प्रिटचार्ड (।संद चतपजबींतक) ने अपने लेख सांख्यिकी ग्रंथसूची अथवा ग्रंथमिति (ैजंजपेजपबंस ठपइसपवहतंचील व िठपइसपवउमजतपबे) के रूप में किया। ग्रन्थमिति अध्ययन ग्रंथों की मापन की एक शोध प्रविधि है जिसके अंतर्गत किसी भी विषय से संबंधित ग्रंथों तथा पत्रिकाओं के विभिन्न पक्षों के संख्यात्मक/ गणनात्मक अध्ययन किया जाता है।

इस प्रविधि के अंतर्गत ब्रेडफोर्ड जिप्स  तथा लोटका का सूत्र, सेनगुप्ता का सिद्धांत, गारफील्ड का लाॅ आफ कन्सेन्ट्रेशन तथा सुब्रमनियम का फार्मूला का उपयोग करते हुए ग्रंथों/पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों तथा लेखकों की संख्या, आवृत्ति, संदर्भों की संख्या, उद्धरण, विश्लेषण तथा सहकारकों की स्थिति तथा लेखों के विकीर्णन की गणना की जाती है।

 

प्रस्तुत आलेख में ‘‘गं्रथालय विज्ञान पत्रिका’’ के लेखों का ग्रन्थमिति अध्ययन किया गया है। जो हिंदी की महत्वपूर्ण पत्रिका है, जिसका प्रकाशन प्रोफेसर कौला ग्रंथालय एवं सूचना विज्ञान, गुंटूर, राजस्थान से किया जाता है। अध्ययन हेतु 1995-2014 तक के कुल 16  खण्डों का चयन किया गया है, जिसमें वर्षानुसार प्रकाशन, लेखों की संख्या, उद्धरित संदर्भों की संख्या तथा सहकारकों की स्थिति की गणना की गयी है।

 

 

 

REVIEW OF LITERATURE:

शर्मा] अरविंद कुमार एवं रामनिवास शर्मा. 2007, ने सन् 1994-2006 तक के प्रकाशित गं्रथालय विज्ञान पत्रिका का ग्रन्थमिति अध्ययन किया गया है, जिसमें उन्होंने निष्कर्ष के रूप में पाया कि 13 वर्षों के प्रकाशन में कुल 9 खंड प्रकाशित हुए हैं, जिसमें 126 लेख तथा 179 लेखक है। तथा डाॅ. सोनल सिंग (विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन) के सर्वाधिक 9 लेख प्रकाशित हुए है।

 

वर्मा, माया एवं माधुरी गौतम 2014, ने सन् 2001-2013 तक के प्रकाशित ग्रंथालय विज्ञान पत्रिका का ग्रन्थमिति अध्ययन किया गया है, जिसमें उन्होंने निष्कर्ष के रूप में पाया कि 13 वर्षांे के प्रकाशन में कुल 12 खंड प्रकाशित हुए है, जिसमें 191 लेख तथा 326 लेखक है, तथा इनमें से 181 उद्धरण सहित एवं 10 उद्धरण रहित है।

 

फैबल अब्दुल्लाह अलहमदी एवं वैशाली खापर्डे 2015, ने 2007-2013 तक प्रकाशित एनल्स आॅफ़ लाइब्रेरी एण्ड इनफार्मेशन साइंस शोध पत्रिका के लेखकत्व एवं सहकारकों की ग्रंथमिति अध्ययन किया है। जिसमें उन्होंने बताया है कि सबसे ज्यादा दिल्ली के लेखकों ने शोध पत्रिका में लेख लिखा है, तत्पश्चात् कर्नाटक, केरल तथा पशिम बंगाल का है।

 

कौर अमृत पाल एवं संगीता अग्रवाल 2015, ने गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के विज्ञान विषय से संबंधित शोध उत्पादकता पर एक ग्रंथमिति अध्ययन किया है, जिसमें उन्होंने निष्कर्ष के रूप में बताया है कि कुल 2201 लेखों में से 1082 लेख को केवल विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखा गया है, वहीं 638 लेख को भारत के अन्य संस्थानों के शिक्षकों के साथ मिलकर लिखा गया है, तथा 481 लेखों को विदेशी संस्थानों के शिक्षकों के साथ मिलकर लिखा गया है।

 

OBJECTIVE:

1.   पत्रिका में प्रकाशित लेखों की संख्या, खण्ड संख्या तथा लेखकों का वर्षानुसार अध्ययन प्रस्तुत करना।

2.   पत्रिका में प्रकाशित लेखों का उद्धरण सहित एवं उद्धरण रहित विवरण प्रस्तुत करना।

3.   सहकारकों की दशा स्थिति को ज्ञात करना।

4.   संख्यानुसार लेखकों का विवरण प्रस्तुत करना।

5.   कुल उद्धरित संदर्भांे की संख्या को ज्ञात करना।

6.   पत्रिका के लेखों में उद्धरित प्रलेखों के प्रकारों को ज्ञात करना।

 

SCOPE:

यह अध्ययन ग्रंथालय एवं सूचना विज्ञान विषय के हिन्दी पत्रिका ‘‘ग्रंथालय विज्ञान’’ के ग्रंथमिति अध्ययन पर आधारित है, जिसमें सन् 1995 से 2014 तक प्रकाशित 16 खण्डों को शामिल किया गया है।

 

METHODOLOGY:

प्रस्तुत लेख ग्रंथमिति अध्ययन पर आधारित है, जो ग्रंथालय एवं सूचना विज्ञान विषय की एक नई प्रविधि है। इस प्रविधि के अंतर्गत किसी भी विषय से संबंधित ग्रंथों तथा पत्रिकाओं के विभिन्न पक्षों का संख्यात्मक/गणनात्मक अध्ययन किया जाता है।

 

सारणी क्रमांक 1 के अवलोकन से स्पष्ट है कि चार खंड द्विवार्षिकी रूप में प्रकाशित हुई है। 1995 से 2014 तक अर्थात 20 वर्षों कि अवधि में देखा जाए तो इसके कुल 16 खंड प्रकाशित हुए हैं। इन 16 खण्डों में 414 लेखकों ने 248 लेख लिखे है, जिनमें से 2001, 2013 तथा 2014 में सबसे अधिक 19 लेख प्रकाशित हुए है, तथा 1997-98 में सबसे कम 10 लेख प्रकाशित हुए हैं, वहीं 2011 में सबसे अधिक 35 तथा 1997-98 में सबसे कम 14 लेखकों ने योगदान दिए हैं।

 

सारणी क्रमांक 2 के अध्ययन से स्पष्ट है कि इस पत्रिका के कुल 248 लेखों में से 224 में उद्धरण है, वहीं 24 में उद्धरण नहीं है तथा इनमें से सबसे अधिक उद्धरण 44 एवं 45 खंड में है, जिसकी संख्या 19 है वहीं सबसे कम 30-31 में है जिसकी संख्या 07 है। तथा सबसे अधिक उद्धरण रहित लेख 30-31 खंड में है, जिसकी संख्या 10 वहीं सबसे कम 32, 33-34 तथा 37 में है जिसकी संख्या 01 है।

 

सारणी क्रमांक 3 संख्यानुसार लेखकों के विवरण से संबंधित है, जिसके अध्ययन से स्पष्ट है कि 30-31 खंड में 10 एकल लेखकों का योगदान है, वहीं 26-27 में 03 एकल लेखक है जो सबसे कम है। दो लेखकों के अंतर्गत 37 एव 45वें खंड में सबसे अधिक योगदान है जिसकी संख्या 22 है, वहीं सबसे कम 33-34 खंड में है जिसकी संख्या 06 है। तीन लेखकों के अंतर्गत 40 एवं 43 वें खंड में सबसे अधिक योगदान है जिसकी संख्या 12 है, तथा सबसे कम 26-27 एवं 37 खंड में है जिसकी संख्या 03 है।

सारणी क्रमांक 4 के अध्ययन से स्पष्ट है कि 1995-96 से 2014 तक के कुल 16 खण्डों में प्रकाशित 248 लेखों में उद्धरित कुल संदर्भों कि संख्या 1512 है जिनमें से सर्वाधिक उद्धरित संदर्भों की संख्या 2013 के 44 खंड में 164 (10.84ः) है। वहीं सबसे कम उद्धरित संदर्भों की संख्या 1999-2000 के 30-31 खंड में 23 (1.52) है।

 

सारणी क्रमांक 5 जो कि लेखों के संदर्भों में उद्धरित प्रलेखों के विभिन्न प्रकार से संबंधित है के अध्ययन से स्पष्ट है कि 1995-96 से 2014 तक के संदर्भों में सर्वाधिक संख्या ग्रंथों की है जिसकी संख्या 683 (45.77:) है। तत्पश्चात् शोध प्रत्रिकाओं की संख्या 430 (28.82:) वल्र्ड वाईड वेब की संख्या 246  (1.6.48:), सम्मेलन कार्यवाही की संख्या 115          (07.70:), न्यूज पेपर की संख्या 09 (0.60:), शोध प्रबंध की संख्या 08 (0.53:), तथा न्यूज बुलेटिन की संख्या 01(0.06:) है।

 

सारणी क्रमांक 6 जो कि सह लेखकों की स्थिति से संबंधित है के विश्लेषण हेतु सुब्रमण्यम द्वारा दिए गए फार्मूला   का उपयोग किया गया है, के अध्ययन से स्पष्ट है कि वर्ष 2011 में सहकारकों कि स्थिति सबसे अधिक 0.89 है वहीं वर्ष 2002-03 में सहकारकों कि स्थिति सबसे कम 0.42 है।

 

 

Finding:

प्रस्तुत शोध पत्र के प्रमुख परिणाम निम्नलिखित है -

1.   इस शेध पत्रिका की आवृत्ति वार्षिकी है, लेकिन इसके चार खंड द्विवार्षिकी के रूप में प्रकाशित हुई है।

2.   20 वर्ष कि अवधि में 248 लेख प्रकाशित हुए है जिसमें कुल 414 लेखकों का योगदान है।

3.   पत्रिका में 248 लेखों में 224 उद्धरण सहित लेख तथा 24 उद्धरण रहित लेख है।

4.   पत्रिका में उद्धरित संदर्भों की कुल संख्या 1512 है।

5.   पत्रिका में उद्धरित संदर्भों की कुल संख्या 1512 में से ग्रंथों की संख्या 683, शोध पत्रिकाओं की संध्या 430, सम्मेलन कार्यवाही की संख्या 115, शोध प्रबंध की संख्या 08, वल्र्ड वाईड वेब की संख्या 246, न्यूज पेपर न्यूज की संख्या 09, तथा बुलेटिन की संख्या 01 है।

6.   पत्रिका में प्रकाशित 248 लेखों में से 97 एक लेखक 119 दो लेखक तथा 30 तीन लेखक वाले लेख है।

7.   वर्ष 2011 में सहकारकों की स्थिति सबसे अधिक 0.89ः है वहीं वर्ष 2002-03 में सहकारकों की स्थिति सबसे कम 0.42ः है।

 

Conclusion:

निष्कर्षतः पाया गया कि इस शोध पत्रिका के 20 वर्ष की अवधि में 248 लेख प्रकाशित हुए हैं जिनमें ग्रंथालय वर्गीकरण एवं सूचीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी, ग्रंथमिति, डिजिटल ग्रंथालय, इंटरनेट, सूचना खोज व्यवहार तथा इलेक्ट्राॅनिक संसाधनों से संबंधित प्रमुख लेख है, जिसमें कुल 414 लेखकों का योगदान है, वहीं उद्धरित संदर्भों की कुल संख्या 1512 है, इस प्रकार यह हिंदी भाषा क्षेत्र वाले शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं पुस्तकालयक्ष्यों की महत्वपूर्ण पत्रिका है।

 

REFRENCES:  

1.    शर्मा अरविंद कुमार एवं शर्मा हेमंत: ग्रंथमिति, ग्रंथालय विज्ञान 28-29, (1-2), 1997-98, पृष्ठ 39-44.

2.    शर्मा अरविंद कुमार एवं शर्मा रामनिवासः ग्रंथालय विज्ञान पत्रिका का ग्रंथमिति अध्ययन, ग्रंथालय विज्ञान 38, (1-2), 2007, पृष्ठ 44-55.

3.    शुक्ला अनिल कुमार एवं शर्मा उमेश: ग्रंथमिति: एक अनुसंधान प्रविधि, ग्रंथालय विज्ञान 38, (1-2), 2007, पृष्ठ 101-109.

4.    वर्मा माया एवं गौतम माधुरी: ग्रंथालय विज्ञान पत्रिका का ग्रंथमिति अध्ययन, ग्रंथालय विज्ञान 45, (1-2), 2014, पृष्ठ 44-55

5.    Kaur Amritpal and Aggrawal Sangeeta: Research Productivity in Sciences in Guru Nanak Dev University : A Bibliometric Study, Professional Journal of Library and Information Technology, 2(1), 2015, P-1-11.

6.    Alhamdi Fawaz Abdullah and Khaparde Vaishali: Authorship and Collaborative patterns in the Annals of Library and Information Studies, 2007 - 2013 : A Scientrometric Study, Professional Journal of Library and Information Technology, 2(1), 2015, P- 12-22.

 

 

Received on 14.02.2016       Modified on 28.02.2016

Accepted on 22.03.2016      © A&V Publication all right reserved

Int. J. Ad. Social Sciences 4(1): Jan. - Mar., 2016; Page 01-06